Author Archives: ashok

Sawaal uthtaa hai…

तुझे देखूँ कि न देखूँ सवाल उठता है, यहाँ हर हाल में कोई बवाल उठता है. किसी सहरा में ज़मींदोज बगूले की तरह, दिले-बरबाद में तेरा ख़याल उठता है. यूँ तो बदरंग हो गयी है जिंदगी मेरी, मेरे ख़्वाबों में … Continue reading

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My First Experience..

Here is my first experience of what is called a meditative state: I first experienced it in the year 1994. I was working in the second shift (2 PM-10 PM). At around 7:30 PM or so, the site work was … Continue reading

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kalam mein nahin..

अशआर उतर पाते नहीं अब कागज़ पे, सियाही जिंदगी में है, पर कलम में नहीं. रहते हैं मेहरबां मेरे रकीब पे ज़ियादा , कुछ बात उसमें है जो गोया हम में नहीं. कि तड़प उठे मेरी रूह तक शिद्दत ऐसी, … Continue reading

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A time to reflect….

Completed 47 years of my life today…. Recollected many events from the past, relived many of them. Tried to peek in to the future. Re-evaluated the present. All said and done, I can say that I have been very fortunate … Continue reading

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tum kaho…

तुम कहो कैसे भुलाऊं स्मृतियों का उपहार कामनाएँ कुछ जगी थीं प्रेम रस से यूँ पगी थीं ओस की बूंदों से जैसे पुष्प का श्रृंगार, क्या हुआ तुम दे न पाए प्रेम का प्रतिकार तुम कहो कैसे भुलाऊं स्मृतियों का … Continue reading

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bhool kar bhi..

दिलो-जाँ में इस तरह से बसाए तुझको, गोया भूल कर भी भूल न पाए तुझको, तुझे देख मेरा दिल संभल नहीं पाता, मेरी बज़्म में कोई न बुलाए तुझको. तू तो जानकर अनजान बना बैठा है, अब कौन दिल का … Continue reading

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yaad kaun karta hai..

याद कौन करता है? मौन एकाकीपन में, हाँ कभी यूँ ही मन में, एक अनजाना सरीखा दर्द सा उभरता है, याद कौन करता है? वो चले गए कब के, साथ तो मैं हूँ सबके, पर मेरे मानस में इक चलचित्र … Continue reading

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yun guzarte hain….

यूँ गुजरते हैं तेरी हर रहगुजर से आज हम, थक गए हों ज्यूँ तेरी उम्मीद से भी आज हम. देख पाना इक नज़र भी आज है कुछ यूँ मुहाल, जैसे सदियों से हुए हों दूर तुझ से आज हम. ढूँढते … Continue reading

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क्या मैं कहना चाहता हूँ….

जब मैं कहता हूँ तुम्हें प्यार किया करता हूँ क्या सोचती हो, क्या मैं कहना चाहता हूँ? माँगता हूँ तेरी जुल्फ़ के घने साये, घड़ी भर को जिनमे आँख मींच सो जाऊँ या बाहों के तेरे ये गुदाज-ओ-नर्म घेरे, गमे-जहाँ … Continue reading

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ho gaya..

जिसको भी मैंने चाहा मगरूर हो गया, सोचा था होगा मरहम नासूर हो गया. मेरे सियाह कूचे और इनमें तेरी आमद, ऐसा लगा कि दिल मेरा पुरनूर हो गया. जान कर खिलौना तुम इस अदा से खेले, शीशे का दिल … Continue reading

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