Category Archives: Ghazals

Imtihaan

दर पे खड़े हैं अज़ल से बा-सब्र हम, लेंगे कितना तिश्नगी का इम्तिहाँ. (अज़ल – Time immemorial, बा-सब्र – With patience, तिश्नगी – Thirst) बस इनायत की नज़र इक चाहिए, इसके बदले दिल ही लेंगे या कि जाँ. जब भी … Continue reading

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Ban Kar…

नहीं थी बेवजह ग़फ़लत मेरे यारों मेरे दिल की, कि लूटा है चमन मेरा किसी ने बागबाँ बनकर. हमें कुछ यूँ सताया वक्त ने तेरे फिराक में, हर लम्हा रह गया है गोया वाकया बनकर. (फिराक = Separation) रही कुछ … Continue reading

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Ladakpan

Laauun kahan se ab wo muskaanaa ladakpan ka, KahiNpe kho gaya hai ab wo mastaana ladakpan ka लाऊँ कहाँ से अब वो मुस्काना लड़कपन का, कहीं पे खो गया है अब वो मस्ताना लड़कपन का. Kar doon bayan ik baar … Continue reading

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Bahaane ko..

झुकी नज़र की पशेमानी हम पे ज़ाहिर है, हटाओ जाने दो, रहने भी दो बहाने को. (पशेमानी – Remorse) तेरे अहद की हम अस्लियत समझते हैं, हटाओ जाने दो, रहने भी दो बहाने को. (अहद – Promise) न कर सके … Continue reading

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fasaane ko…

हुए तुम गैर के अब क्या रहा हमारे लिए, करेंगे ज़िन्दगी का रुख किसी वीराने को. करेगा याद कोई क्या तुम्हे हमारे बाद, कभी रहा नहीं किसी का गम ज़माने को. होता नहीं कुछ माज़ी-ए-गम से हासिल करो न याद … Continue reading

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Kar LooN…

दिल ये चाहे एक पल को मैं भी कोई सवाब कर लूँ, आज अपने गुनाहों का बस एक आदिल हिसाब कर लूँ. ज़ब्त करके जी रहा हूँ है नहीं तुझको खबर, डूब जाए ये जहाँ गर चश्म को सेर-आब कर … Continue reading

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Chaahtaa hun…

बेखुदी में गम को खोना चाहता हूँ, थक गया हूँ, अब मैं सोना चाहता हूँ. सामने औरों के तो हँसता रहा, हो मुखातिब तेरे रोना चाहता हूँ. गर हो मुमकिन तो तेरे दिल का कँवल, अपने अश्कों से भिगोना चाहता … Continue reading

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gaye jab se tum hameN chhod ke…

मुझे याद आता है रात दिन तेरे संग गुज़रा हरेक पल गए जब से तुम हमें छोड़ के हर राह सूनी हो गयी, नहीं चैन मुझको कहीं मिला सहरा हो या कोई रंगमहल. मुझे याद आता है रात दिन तेरे … Continue reading

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Maangta Hun Bas Yahi….

जिस जगह तू भी पराया सा लगे, उस शहर में दिल हमारा क्या लगे. जानता तू होगा कि तेरा सुकूत, इस दिले-नाज़ुक में खंज़र सा लगे. (सुकूत = silence) मेरे पिन्दारे-मुहब्बत की ना पूछ, चूर होकर आज ज़र्रा सा लगे. … Continue reading

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Dastuur Hai

है सिकंदर या सुलेमाँ, ईसा या मंसूर है हर कोई अपनी जगह हालात से मजबूर है मुन्तज़िर अशआर हैं बस तेरे तब्सिरा के, तारीफ़ न कर पाए तो तनक़ीद भी मंज़ूर है. हैं मुहाफ़िज़ हर घडी उस हादिसे के बाद … Continue reading

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