Ban Kar…

नहीं थी बेवजह ग़फ़लत मेरे यारों मेरे दिल की,
कि लूटा है चमन मेरा किसी ने बागबाँ बनकर.

हमें कुछ यूँ सताया वक्त ने तेरे फिराक में,
हर लम्हा रह गया है गोया वाकया बनकर.

(फिराक = Separation)

रही कुछ यूँ इसे उम्मीद सौगात-ए-मुहब्बत की,
सहे तेरे सितम भी दिल ने अकसर बेज़ुबां बनकर.

यही थी आरजू जागे मेरी तकदीर-ए-खाविदा,
जियें दो चार दिन हम भी तुम्हारे आशना बन कर.

(तकदीर-ए-खाविदा = Sleeping luck)

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