Chaahtaa hun…

बेखुदी में गम को खोना चाहता हूँ,
थक गया हूँ, अब मैं सोना चाहता हूँ.

सामने औरों के तो हँसता रहा,
हो मुखातिब तेरे रोना चाहता हूँ.

गर हो मुमकिन तो तेरे दिल का कँवल,
अपने अश्कों से भिगोना चाहता हूँ.

अपने हाथों जाविदाँ खुशियों के फूल,
तेरी जुल्फों में पिरोना चाहता हूँ.

(जाविदाँ = Permanent)

हो सहर जिसकी क़यामत के ही रोज़,
एक ऎसी नींद सोना चाहता हूँ.

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