निकले तो सही, तेरे बहाने निकले,
आज फिर कुछ दर्द पुराने निकले.
जब जब लगा कि भूल सा गया तुझको,
अब्रो-माह तेरी याद दिलाने निकले.
(अब्रो-माह = clouds and moon)
वो वस्ल के लम्हात कितनी शिद्दत से,
याद आये जब भी तुमको भुलाने निकले.
(वस्ल = मिलन, लम्हात = क्षण, शिद्दत = intensity)
लगे इलज़ाम यूँ हम पर जो शादमानी के,
ज़ेर-ए-माज़िरत फिर दर्द कमाने निकले.
(शादमानी = प्रसन्नता, ज़ेर-ए-माज़िरत = मजबूरी में)
ये सोच कर कुछ कम तो हो ये दिल की जलन,
गरेबाँ चाक कर के तेरे दीवाने निकले.
तेरे सितम की इन्तिहाँ भी है कि नहीं,
तेरे करम की आस, ज़माने निकले.