Diye..

रोशन रहें हमेशा इत्तेहाद के दीये.
बुझने न देना देखो इनइकाद के दीये.

(इत्तेहाद = friendship, इनइकाद = celebration)

हस्ती पे ये छाई है तीरगी सी चारसू,
दिल में मगर रोशन हैं तेरी याद के दीये.

(तीरगी = अँधेरा, चारसू = चारों तरफ)

जलने दें वीराने में, कि महफ़िल में आपकी,
कुछ काम न आयेंगे इस नाशाद के दीये

(नाशाद = Unhappy/Sad)

कहता चला जाऊँगा उनकी याद में अशआर,
बुझ जाएँ या रोशन रहें ये दाद के दीये.

(अशआर = Plural of Sher (couplet) दाद = applause, praise)

माना कि याँ छाई हुई है तीरगी लेकिन,
हों कैसे फ़रोज़ाँ दिल-ए-बर्बाद के दीये.

(फ़रोज़ाँ = illuminated)

ग़मगीन है महफ़िल मगर मज़बूर है “अशोक”,
खुद ग़मज़दा लाये कहाँ से शाद के दीये.

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