fasaane ko…

हुए तुम गैर के अब क्या रहा हमारे लिए,
करेंगे ज़िन्दगी का रुख किसी वीराने को.

करेगा याद कोई क्या तुम्हे हमारे बाद,
कभी रहा नहीं किसी का गम ज़माने को.

होता नहीं कुछ माज़ी-ए-गम से हासिल
करो न याद भुला दो मेरे फ़साने को.

कहाँ से लायें तेरे बाद खुशी के नगमे,
करेंगे गमजदा अब हम हरेक तराने को.

सिवा यादों के कुछ नहीं है अब हमारे पास,
भला हम कैसे भुला दें तेरे फ़साने को.

रहे रूठे हुए इस आस में क़यामत तक,
कभी तो आओगे तुम भी हमें मनाने को.

हँसी लबों पे मेरे आज आ नहीं सकती,
तुम्हारी याद चली आई है रुलाने को.

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