Jaltaa Rahaa

ख्वाहिशों की आग में जलता रहा,
मोम की मानिंद मैं गलता रहा .

मिलते रहे अहबाब बिछुड़ते रहे,
ज़िंदगी का कारवां चलता रहा.

(अहबाब – Friends)

कैसे बचाता तिफ्ल बेबस सादगी,
क़ालिब-ए-दुनिया में बस ढलता रहा.

(तिफ्ल – Child, क़ालिब – Mould)

क्या ग़ज़ब था जो मुझे तू मिल गया,
रश्क में सारा जहाँ जलता रहा.

(रश्क – Jealousy)

उलझा रहा औरों की सोहबत में “अशोक”
और खुद से सामना टलता रहा.

(सोहबत – Company)

And some in lighter vein..

ख्वाहिश-ए-आराम में शादी किया,
फिर पकौड़े मूंग के तलता रहा.

बेरहम था यार सा मेरा रकीब,
मूंग छाती पर मेरी दलता रहा.

ले गया मेरे यार को मेरा रकीब,
और बेबस हाथ मैं मलता रहा.

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