Kar LooN…

दिल ये चाहे एक पल को मैं भी कोई सवाब कर लूँ,
आज अपने गुनाहों का बस एक आदिल हिसाब कर लूँ.

ज़ब्त करके जी रहा हूँ है नहीं तुझको खबर,
डूब जाए ये जहाँ गर चश्म को सेर-आब कर लूँ.

(चश्म – Eye, सेर-आब – Moist)

नेक कह करती रही मुझको ये दुनिया इस्तेमाल,
सोचता हूँ क्यों न अपनी नेकनामी खराब कर लूँ.

ये तमन्ना इक ज़माने भर से दिल में है जवाँ,
रूबरू होकर मैं तुझसे ज़िन्दगी कामयाब कर लूँ.

करके रोशन बज़्म-ए-दिल करता रहा मैं इन्तिज़ार,
तू न आया तो ये दिल कहता है खाना खराब कर लूँ.

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