Maangta Hun Bas Yahi….

जिस जगह तू भी पराया सा लगे,
उस शहर में दिल हमारा क्या लगे.

जानता तू होगा कि तेरा सुकूत,
इस दिले-नाज़ुक में खंज़र सा लगे.

(सुकूत = silence)

मेरे पिन्दारे-मुहब्बत की ना पूछ,
चूर होकर आज ज़र्रा सा लगे.

(पिन्दारे-मुहब्बत = pride of love)

डर रहा हूँ दर्द जो तुमने दिया,
आह बनकर ना तुम्हें ये जा लगे.

माँगता हूँ बस यही इतनी दुआ,
तू मेरी मानिंद दुखने ना लगे.

दिल में है इतनी मुहब्बत कि “अशोक”,
आज भी क़ातिल वो अपना सा लगे.

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