Neend gar na bhi aaye…

एक नई रूबाई:

नींद गर न भी आये, तो भी रातें बीत जाती हैं,
तन्हाईयाँ कुछ हसरतों के गीत गाती हैं,
बाक़ी नहीं अब यूँ तो कोई गम मगर फिर भी,
तुम्हारी याद आती है तो पलकें भीग जाती हैं.

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