rooh ko

तुम न थे तो बेसबब सी कट रही थी ज़िंदगी,
तुम मिले तो मिल गई हैं राहतें इस रूह को.

(बेसबब = Aimless)

था अज़ल से तेरे आने का मुझे एक इन्तिज़ार,
तुम जो आये मिल गया आराम फिर इस रूह को.

(अज़ल = Time immemorial)

खोजता फिरता था मैं, शै कोई इक अनजान सी,
देख तुझको याद आई बात कुछ इस रूह को.

हैं बहुत यूँ तो कई खुशियाँ मेरी इस जीस्त में,
इक कमी खलती है तेरी, पुरसुकूं इस रूह को.

(पुरसुकूं = Peaceful, जीस्त = life)

मान लूँगा मैं तेरा एहसान, गर तू दे सके,
क़ैद-ए-अरमाँ से रिहाई जो कभी इस रूह को.

मत नसीहत दे मुझे नासेह, कि भाती नहीं,
वक़्त-ए-रुखसत इल्म की बातें किसी मजरूह को.

(नासेह = Preacher, वक़्त-ए-रुखसत = Time of departure, मजरूह = wounded/hurt/smitten)

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