Sahar Hui Hai…

न हो मायूस कि ये जंग अब भी जारी है,
इश्क के सामने अक्सर ये दुनिया हारी है.

सहर हुई है मगर सूझता नहीं कुछ भी,
नशा विसाल का हम पर अभी भी तारी है.

(सहर: Morning, विसाल: Tryst, meeting, तारी = छाया हुआ)

अब ये लगता है क़यामत को ही आएगी सहर
शब-ए-फिराक का हर लम्हा दिल पे भारी है.

(शब-ए-फिराक : Night of separation)

वफ़ा शामिल मेरी फितरत में है यारों मेरे,
ग़मों को छोड़ दूं कैसे पुरानी यारी है.

मेरी नज़र में ही वो ताब नहीं है वरना,
कहाँ “अशोक” से खालिक को पर्दादारी है.

(खालिक: God)

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