Samajh Paaye Nahin…

(Another one from my pen. To be hummed with the tune of “Lut gayaa din raat ka aaraam kyun” sung by Mukesh):

जो गए वो लौट कर आये नहीं,
अब कोई उनकी गली जाए नहीं.

ज़ख्म जो तूने दिए मेरी जान को,
उम्र गुज़री फिर भी भर पाए नहीं.

वो हुए क्यूँ आशना से अजनबी,
चाह कर भी हम समझ पाए नहीं.

है दुआ मेरी यही कि तू कभी,
हम सा तन्हाई में घबराए नहीं.

तू जहाँ चाहे वहीँ से प्यार ले,
कोई तेरी चाह ठुकराए नहीं.

क्या करें तुमसे गुज़ारिश और हम,
तुम हमें कुछ भी समझ पाए नहीं.

मिलती है दिल तोड़ने की जो सज़ा,
वो कभी मेरे यार तू पाए नहीं.

गुल खिलें यूँ तेरे क़दमों के तले,
कोई काँटा तुझको छू पाए नहीं.

अलविदा ऐ दोस्त तू यूँ खुश रहे,
पास तेरे ग़म कोई आये नहीं.

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