Sawaal uthtaa hai…

तुझे देखूँ कि न देखूँ सवाल उठता है,
यहाँ हर हाल में कोई बवाल उठता है.

किसी सहरा में ज़मींदोज बगूले की तरह,
दिले-बरबाद में तेरा ख़याल उठता है.

यूँ तो बदरंग हो गयी है जिंदगी मेरी,
मेरे ख़्वाबों में ये किसका जमाल उठता है.

मेरी तनहाई की बेचैन सियह रातों में,
तुम्हारी याद का देखो हिलाल उठता है.

कितना भी करूँ ज़ब्त तेरी चाहत को,
तू हासिल नहीं इसका मलाल उठता है.

saharaa: Desert
zameentoj: Buried.
Bagoolaa: Whirlwind
jamaal: beauty
hilaal: crescent moon

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