Toofan se..

Wrote this ghazal yesterday…

थक गए जब खेल मेरी जान से,
अब मिलोगे हमसे तुम अनजान से.

कैसे हो पायेंगे फिर से अजनबी,
दोस्त थे, न ग़ैर एक मेहमान से.

तुम ही मेरे दिल के हो सबसे करीब,
मान लो, कहता हूँ मैं ईमान से.

दे के खुशियाँ पल को फिर ग़म दे दिया,
ऐ खुदा, मत खेल मेरी जान से.

बढ़ रहा हूँ फिर से साहिल की तरफ,
थक गया लड़ जज़्बा-ए-तूफ़ान से.

अब सबक ये सीख ले नादाँ “अशोक”,
दूर ही रह हर हसीं अनजान से.

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One Response to Toofan se..

  1. yogshastri says:

    बढ़ रहा हूँ फिर से साहिल की तरफ,
    थक गया लड़ जज़्बा-ए-तूफ़ान से.

    वाह लेकिन इतनी जल्दी मत थक यार!

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