Udaas Kar Jaaye..

गुज़रते वक़्त की आवाज़-ए-पा से डरता हूँ,
न जाने कौन सा लम्हा उदास कर जाए.

रहो तुम दूर ही मुझसे कि मैं न चाहूँगा,
कि मेरा ग़म कहीं तुमको उदास कर जाए.

कोई बेचारगी छाई है ज़ेहन पर ऐसी,
ग़म किसीका हो दिल को उदास कर जाए.

ग़म-ओ-ख़ुशी की हद से अब मैं बाहर हूँ,
जहाँ में कुछ नहीं अब जो उदास कर जाए.

तेरे दीदार-ए-रुख से रोज अब मैं डरता हूँ,
कहीं वो जुस्तजू न फिर उदास कर जाए.

कहने से पहले इतना तो ख़याल कर “अशोक”,
कि तेरी बात न उस को उदास कर जाए.

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