yun guzarte hain….

यूँ गुजरते हैं तेरी हर रहगुजर से आज हम,
थक गए हों ज्यूँ तेरी उम्मीद से भी आज हम.

देख पाना इक नज़र भी आज है कुछ यूँ मुहाल,
जैसे सदियों से हुए हों दूर तुझ से आज हम.

ढूँढते थे रूह की तकलीफ की जिनमें दवा,
बाज़ आये इश्क की गलियों से देखो आज हम.

ना सही अंजाम तेरी हर कहानी का तो क्या,
हैं मगर भूली कहानी का तेरी आगाज़ हम.

जो थे हमको ले गए कूचों में ज़न्नत की “अशोक”,
भूल बैठे हैं उन्ही परों की वो परवाज़ हम

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