zindagi jab bhi teri

जिन्दगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें
ये जमी चाँद से बेहतर नजर आती हैं हमें

सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज बुलाती हैं हमें

याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज जगाती हैं हमें

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है
अब तो हर वक्त यही बात सताती हैं हमें

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