Maana mere haseen sanam (Adventure of Robin Hood) (1965)

माना मेरे हसीं सनम, तू रश्क़-ए-माहताब है
गर तू है लाजवाब तो, मेरा कहाँ जवाब है

हैरत से यूँ न देखिये, ज़र्रा हुआ तो क्या हुआ
अपनी जगह पे जान-ए-मन, ज़र्रा भी आफ़ताब है
गर तू है लाजवाब तो, मेरा कहाँ जवाब है
माना मेरे हसीं सनम

तेरे शबाब का सुरूर छाया जो दो जहाँ पर
मेरी निगाह-ए-शौक़ से आया ये इनक़लाब है
गर तू है लाजवाब तो, मेरा कहाँ जवाब है
माना मेरे हसीं सनम

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