tere pyar ko..

तेरे प्यार को इस तरह से भुलाना
न दिल चाहता है न हम चाहते हैं
जो सच था उसे इक फ़साना बनाना
न दिल चाहता है …

वो मासूम सूरत भोली निगाहें
रहेंगी सदा दिल में आबाद होकर
न पूरी हुई जो उसी आरज़ू में
मिलेगा हमें चैन बरबाद हो कर
कि उजड़ी हुई ज़िन्दगी को बसाना
न दिल चाहता है …

समझ में न आया कि हर इक ख़ुशी से
ये दिल आज बेज़ार क्यों हो गया है
तेरे ग़म में बहते हुए आँसुओं से
न जाने हमें प्यार क्यों हो गया है
कि भूले से भी अब कभी मुस्कराना
न दिल चाहता है …

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